रविवार, 15 मई 2016

क्या विधानसभा चुनाव में नारायण चंदेल का विकल्प बनेंगे बिशुन ?

बिशुन कश्यप को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का सदस्य बनाना सोची समझी रणनीति


राजेश सिंह क्षत्री
जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस


Bishun Kashyap
पिछले 23 साल से नजर अंदाज किए जा रहे बिशुन कश्यप को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का सदस्य बनाए जाने से जहां उनके अथरिया कुर्मी समाज में हर्ष की लहर व्याप्त है वहीं पार्टी के ही लोग आश्चर्य चकित है। 1993 में पामगढ़ विधानसभा से प्रत्याशी बनाए जाने के बाद यह पहला अवसर है जब पार्टी ने उन पर इतना भरोसा जताया है ऐसी स्थिति में यह कोई तुक्का तो बिल्कुल नहीं हो सकता वो भी तब जब विगत 12 वर्षो से सत्ता में रहने के चलते एक-एक पद को पाने के लिए पार्टी में लंबी लाईन लगी हो, ऐसी स्थिति में इतने वर्षो बाद बिशुन कश्यप की नियुक्ति के एक ही मायने हो सकते हैं वो यह कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें जांजगीर-चांपा विधानसभा मंे नारायण चंदेल के विकल्प के रूप में उभारना चाहती है।
Narayan Chandel 
दो साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में जांजगीर-चांपा विधायक नारायण चंदेल और बिल्हा विधायक धरम लाल कौशिक के बीच बहुत सारी बातें चुनाव मैदान में उतरने के समय समान रही। दोनों एक ही समाज कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं वहीं एक छत्तीसगढ़ विधानसभा में अध्यक्ष तो दूसरा उपाध्यक्ष रहते हुए चुनावी वैतरणी पार करने के लिए चुनाव मैदान में उतरे थे। दोनों के परिणाम भी एक समान रहे जब जनता ने दोनों को नकार दिया उसके बाद धरमलाल कौशिक पर पार्टी ने तत्काल भरोसा जताते हुए उन्हें प्रदेशाध्यक्ष के रूप में पूरे प्रदेश की जवाबदारी थमा दी वहीं नारायण चंदेल के समर्थक उन्हें लालबत्ती मिलने अथवा पार्टी में महत्वपूर्ण जवाबदारी मिलने की बाट जोहते रहे। नारायण चंदेल की छवि विधानसभा के भीतर और बाहर एक दबंग और जुझारू नेता की रही है जिससे उनके समर्थक उन्हें पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक के मुकाबले का नेता मानते रहे हैं उसके बाद भी पिछले दो विधानसभा चुनाव में उनके टिकट का फैसला अंतिम समय में उनके पक्ष में हो पाया था। 2003 में विधानसभा चुनाव में हार के बाद ही नारायण चंदेल एक बार फिर से पूरी तरह से विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गए थे तथा उन्होंने अपने चांपा विधानसभा का ऐसा कोई कोना नहीं बचा रखा था जहां वो नहीं पंहुचे थे, इसी बीच वो संगठन में प्रमुख पदों पर भी रहे लेकिन 2008 में जब टिकट वितरण का समय आया तो पार्टी उनसे किनारा करते नजर आई तथा उनके विकल्प तलाशे जाने लगे। तत्कालिन दावेदार तब यह भी दावा करते नजर आए कि पार्टी नारायण चंदेल को अंतिम मौका देना चाहती है और उनके हारने के बाद अगले चुनाव में वैसे ही उनकी दावेदारी समाप्त हो जाएगी लेकिन चुनाव के नतीजे उसके उलट आए तथा अपनी पांच साल की सक्रियता के दम पर नारायण चंदेल विधानसभा तक पंहुचने में सफल रहे। 2013 में विधानसभा चुनाव करीब आते-आते पूरी सक्रियता के बाद भी पार्टी उनका विकल्प तलाशते रही। तब पार्टी फोरम में जिले के तमाम दिग्गज नारायण चंदेल का टिकट काटकर किसी भी अन्य प्रत्याशी को टिकट दिए जाने की मांग करते नजर आए लेकिन वो जीतने योग्य दावेदार कौन होगा यह कोई नहीं बता सका तथा दबी जुबान से सारे दावेदार अपने स्वयं का नाम ही आगे करते नजर आए। इस बीच नारायण चंदेल की सीट बदले जाने की चर्चाएं भी आम हुई लेकिन पार्टी जांजगीर-चांपा विधानसभा में उसका विकल्प नहीं तलाश सकी ऐसी स्थिति में अंतिम समय में पार्टी ने एक बार फिर से उन्हीं पर अपना भरोसा जताया। 2013 का विधानसभा चुनाव अब इतिहास की बात हो गई है और अमित शाह की केन्द्रीय अध्यक्ष बनने तथा धरम लाल कौशिक के एक बार फिर से प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद संगठन चुनाव के बहाने पूरी पार्टी अभी से आगामी विधानसभा चुनाव में जुट गई है तथा पार्टी ने अभी से उसके लिए मोहरे बिठाने प्रारंभ कर दिया है ऐसी स्थिति में बिशुन कश्यप का अनायास राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का सदस्य बनना महज इत्तफाक या तुक्का नहीं हो सकता। एक ही समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष धरमलाल कौशिक और नारायण चंदेल बराबरी के नेता माने जाते हैं वहीं बिशुन लाल कश्यप भी उसी कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं वहीं जांजगीर-चांपा विधानसभा में अथरिया कुर्मी समाज उनके साथ खड़ा नजर आता है जो अक्सर गुटीय लड़ाई के चक्कर में नारायण चंदेल के खिलाफ दिखाई पड़ता रहा है। महंत के शहीद रामकुमार कश्यप की मूर्ति का अनावरण मुख्यमंत्री से करवाने के लिए क्षेत्र के अथरिया कुर्मी समाज के लोग और शहीद के परिजन बिशुन कश्यप के माध्यम से ही धरमलाल कौशिक तक पंहुचे तथा उनकी मदद से ही मुख्यमंत्री के महंत आने का कार्यक्रम मूर्त रूप ले पाया। यही वो क्षण रहे जब लंबे समय बाद पार्टी के लोगों को बिशुन कश्यप की सक्रियता का एक बार फिर से अहसास हुआ। इससे पहले पार्टी की ओर से बिशुन कश्यप 1993 में पामगढ़ विधानसभा के प्रत्याशी बने थे जब वो 25643 वोट पाकर 33725 वोट पाने वाले बहुजन समाज पार्टी के दाऊराम रत्नाकर से पराजित हुए थे। तब पामगढ़ में निर्दलीय दामोदर प्रसाद तीसरे तो कांग्रेस प्रत्याशी बलभद्र शरण सिंह चौथे नंबर पर रहे थे। उससे पहले 1990 में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पामगढ़ से अपना प्रत्याशी नहीं उतारकर जनता दल के आनंद मिश्रा का समर्थन किया था वहीं उसके बाद 1998 में हुए विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने उनकी जगह शकुंतला सिंह पर भरोसा जताया था। इस तरह से 1993 के बाद से ही बिशुन कश्यप को पार्टी में कोई बहुत बड़ी जवाबदारी नहीं दी गई थी। इस बीच हालांकि वो मंडी और पंचायत की राजनीति के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी सक्रियता बनाए रहे वहीं विधानसभा के लिए भी दावेदारी करते रहे लेकिन पार्टी केे लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेकर नजर अंदाज करते रहे। उसके बाद अब जबकि विधानसभा चुनाव में ढाई साल का समय शेष है पार्टी की ओर से उन्हे अचानक बड़ी जवाबदारी दी गई है तो पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष नारायण चंदेल को आने वाले खतरे को भांपते हुए अभी से सावधान हो जाने की जरूरत है। 

शनिवार, 7 मई 2016

08 बहनों का भाई करा रहा 31 निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह

युवा अधिवक्ता के जोश को छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस का सलाम


निःशुल्क सामूहिक विवाह को यादगार बनाने के लिए बलौदा तैयार

राजेश सिंह क्षत्री /छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस
दुनिया में कन्यादान से बड़ा और कोई दान नहीं है इसलिए हर व्यक्ति अपने जीवन काल में एक बार कन्यादान का सुख जरूर प्राप्त करना चाहता है यही वजह है कि वह उस एक कन्यादान का सुख प्राप्त करने के लिए अपनी पूरी जमा पूंजी दांव पर लगा देता है। यही वजह है कि एक विवाह के खर्च के लिए राशि एकत्रित करने और विवाह संपन्न होने के बाद उसके कर्ज से उबरने के लिए ही लोगो को बरसो लग जाते हैं ऐसी स्थिति में बलौदा के युवा अधिवक्ता माधव शराफ के द्वारा अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर कराया जाने वाला निःशुल्क सामूहिक विवाह कराने का निर्णय जोखिम भरा होने के साथ-साथ काबिले तारीफ है।
जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा के युवा अधिवक्ता माधव शराफ के द्वारा अपने युवा साथियों के साथ दो माह से भी अधिक समय तक की जा रही मेहनत का प्रतिफल कल 31 जोड़ों के दिल से निकली अथाह दुवाओं के रूप में सामने आएगा जब ये जोड़े निःशुल्क सामूहिक विवाह में एक दूजे से जन्म जन्मांतर तक साथ रहने के बंधन में बंध जाएंगे। इस निःशुल्क सामूहिक विवाह के साक्षी बनने के लिए बलौदा नगर तैयार दिख रहा है। अक्षय तृतीया के दिन यहां का एक युवा अपने जोश, जुनून और कुछ अच्छा करने की जिद के चलते मानवता की एक मिसाल कायम करने जा रहा है जब उसके द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह में एक साथ 31 जोड़ो के विवाह का कार्यक्रम संपन्न होगा। बलौदा नगर में होने वाले इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के साक्षी बनने के लिए पूरा बलौदा नगर तैयार नजर आ रहा है। माधव शराफ के साथ गोविंद कुंभकार, कृष्णकुमार सोनी, एस कुमार देंवागन, शैलेन्द्र सोनी, राजेन्द्र कंवर, अरूण आदित्य, पूरन कुम्हार, महेश कुम्हार, बलराम कुम्हार, दीपक कुम्हार, अजय आदित्य, सूरज आदित्य, जीवधन, सैयद कलीम, ब्यासनारायण केंवट, गंगाराम केंवट, संजय धीवर, कादिर मोहम्मद, जीवन सिंह कंवर, रमेश सोनी, विनोद सोनी, जवाहर सोनी, टंकेश्वर सोनी, तुमेश्वर सोनी, लक्ष्मी सोनी, उधो प्रसाद सोनी, महेन्द्र मोहन सोनी, जीवन सोनी, रामप्रकाश सोनी, विजय सोनी, रामलाल सोनी के साथ सैकड़ो लोग इस पूरे आयोजन को यादगार बनाने के लिए विगत दो माह से जी जान से जुटे हुए हैं।

हर वर्ग के लोगो का होगा विवाह

निःशुल्क सामूहिक विवाह की रूपरेखा तैयार होने तथा क्षेत्र में प्रचार प्रसार के बाद उसके लिए पंजीयन प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी जिसमें 31 जोड़ों ने विवाह की सहमति जताई है। सभी जोड़े युवा है तथा 18 वर्ष से 25 वर्ष के आयु वर्ग के हैं जिसमें अनुसूचित जाति वर्ग के 12, अनुसूचित जनजाति वर्ग के 05, सोनी समाज के 04, कहरा समाज के 02, यादव समाज के 02 राजपूत समाज के 01 जोड़े सहित अन्य समाज के युवक-युवतियों का विवाह होगा।

जगन्नाथ मंदिर से निकलेगी बारात

 आज अक्षय तृतीया के अवसर पर जिन लोगांे का विवाह होना है उसमें शामिल सभी वर पक्ष के लोग जगन्नाथ मंदिर बलौदा से बारात लेकर शाम को चार बजे निकलेंगे जो 07 बजे बिजली आफिस बलौदा स्थित मैदान पंहुचेंगे जहां विवाह कार्यक्रम संपन्न होगा।

ऐसे आया विचार

अधिवक्ता माधव शराफ की खुद की आठ बहने हैं इसलिए वो विवाह कार्य में कन्या पक्ष को होने वाले दुख तकलीफों से भली भांति परिचित है। एक बार माधव का परिचय बिलासपुर जिले के ग्राम कुली की एक असहाय लड़की से हुआ जिसके घर की माली हालत देखने के बाद उन्होंने उसके विवाह के लिए जरूरत के हिसाब से आर्थिक सहयोग किया था जिसके बाद ऐसे जरूरत मंद लोगों के विवाह का पूरा खर्च उठाने का बीड़ा उन्होंने उठाया और निःशुल्क विवाह समारोह का आयोजन किया। विवाह करने वाले लोगों की आर्थिक स्थिति को जांचने माधव खुद सभी लोगों के घर गए।  

वरिष्ठ नागरिकों का होगा सम्मान

     अक्ती के दिन आयोजित इस सामूहिक विवाह समारोह को यादगार बनाने के लिए बलौदा के 50 वरिष्ठ नागरिकों का भी सम्मान किया जाएगा।

ऐतिहासिक होगा आयोजन

युवा अधिवक्ता माधव शराफ और उसके साथियों ने अक्षय तृतीया को आयोजित इस विवाह समारोह को यादगार बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारी कर रखी है, बारात को यादगार बनाने के लिए 130 लोगों की कर्मा पार्टी तथा बैंड पार्टी साथ चलेगी वहीं 31 दुल्हों के लिए अलग-अलग 31 कारों का इंतजाम किया गया है। दुल्हन को दहेज के रूप में पचहर, पायल, आलमारी सहित जरूरी सामान दिए जायेंगे वहीं बिजली विभाग के मैदान में वर-वधु के लिए हाइड्रोलिक स्टेज उपलब्ध रहेगा वहीं पांच हजार लोगों के भोजन की व्यवस्था भी की गई है।

गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

पिता की सीमित आय भी रोक नहीं सकी प्रखर का तेज

  Chhattisgarh Express

Aalok Kumar Hota
 सरस्वती शिशु मंदिर चांपा में पढ़ने वाला प्रखर कौशल चांपा में अपने पिता उपेन्द्र कौशल और मां अर्चना कौशल के साथ रहता है। प्रखर के पिता उपेन्द्र कौशल डोंगाघाट चांपा के पास स्थित धर्मशाला में रामअवतार मोदी के यहां देखरेख का काम करते हैं। प्रखर के पिता की आय सीमित है उसमें से भी बड़ा हिस्सा मकान किराए में खर्च हो जाता है जिसके बाद भी प्रखर पढ़ाई कर रहा है। प्रखर की मां अर्चना गृहिणी है। प्रखर के पिता पांच साल पहले उत्तरप्रदेश से चांपा आ गए थे तब से वो यहां निवासरत है। अपनी सफलता का श्रेय प्रखर अपने माता पिता और गुरूजनों के साथ साथ अपनी बड़ी दीदी को देता है। प्रखर गणित विषय लेकर आगे पढ़ना चाहता है वहीं आगे चलकर वह रेल्वे के क्षेत्र में जाना चाहता है।


राहुल की ख्वाहिश आईएएस बनने की


  राहुल कुमार देंवागन सरस्वती शिशु मंदिर चांपा का छात्र है। उसके पिता सुशील कुमार पंडित सुंदर लाल शर्मा यूनिवर्सिटी में अंबिकापुर में पदस्थ है वहीं माता अनिता गृहिणी है। राहुल को 580 अंकों के साथ कक्षा दसवीं की प्रावीण्य सूची में राज्य में सातवां स्थान प्राप्त हुआ है। राहुल रोजाना पांच से छः घंटे तक पढ़ाई करता था। उसने अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरूजनों के साथ-साथ परिवार वालों को दिया है। राहुल की ख्वाहिश आईएएस बनने की है।

शिक्षा विभाग से संबद्ध है आलोक के पिता


    जिले के अंतिम छोर में बसे चन्द्रपुर के सरस्वती शिशु मंदिर से इस बार कक्षा दसवीं की प्रावीण्य सूची में नौवे नंबर पर आलोक कुमार होता आया है। आलोक के पिता गिरधारी लाल डभरा ब्लाक के चंदली में अंग्रेजी के व्याख्याता है वहीं मां बबीता रानी गृहिणी है। आलोक का निवास रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लाक का ग्राम पुनगा है। छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बात करते हुए आलोक ने बताया कि वह गणित विषय लेकर आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहता है तथा आगे चलकर वह पीएससी के माध्यम से एडमिनिस्ट्रेशन में जाना चाहता है। आलोक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने मम्मी पापा को दिया है।

टीवी देखते ही फूट फूटकर रो पड़ी वह

Janjgir-Champa / chhattisgarh express  
Aakriti Rathore
जिला मुख्यालय में शारदा मंदिर के पीछे निवास करने वाली आकृति राठौर को प्रावीण्य सूची में आने का पूरा भरोसा था इसीलिए वह दस बजे से टीवी के सामने चिपकी हुई थी वहीं साढ़े दस बजे के बाद से टीवी पर प्रावीण्य सूची में आने वाले लोगों के नाम लिखाने प्रारंभ हो गए। लगभग सभी चैनलों में पहले नंबर पर रायगढ़ के हेमंत कुमार साहू के आने और दूसरे नंबर पर जांजगीर से अदिति राठौर और श्रुति साहू के आने की खबरे चलने लगी जिसके बाद आकृति राठौर फूट फूट कर रो पड़ी। थोड़ी देर में चैनलों में अदिति राठौर की जगह आकृति राठौर लिखाना प्रारंभ हुआ वहीं घर वालों ने भी उसे समझाया कि राज्य में पहला नहीं आई तो क्या हुआ दूसरा आना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। आकृति राठौर के पिता अरविंद राठौर उसी ज्ञानदीप स्कूल में शिक्षक हैं जहां आकृति पढ़ाई करती है वही उसकी मां गृहिणी है। आकृति आगे गणित विषय लेकर पढ़ना चाहती है वहीं उसकी ख्वाहिश कलेक्टर बनने की है। अपनी सफलता का श्रेय आकृति अपने मम्मी-पापा के साथ-साथ अपने गुरूजनों और ज्ञानदीप स्कूल के प्राचार्य अखिलेश कटकवार को देती है। आकृति को गणित में पूरे सौ में सौ अंक मिले हैं वहीं उसे कुल 97.5 प्रतिशत अंक हासलि हुए हैं।

मजदूर मां के सपनों को बेटी ने किया साकार



Janjgir
suruchi sahu
जिला मुख्यालय से लगे हुए बलौदा विकासखंड के ग्राम जर्वे में श्रीमती शकुंतला साहू अपने पति की मौत के बाद अपने पिता के साथ रहती है वहीं मजदूरी कर वह अपने बच्चों को पढ़ा रही है। राज्य में प्रावीण्य सूची में दूसरे नंबर पर आने वाली सुरूचि उनकी ही बेटी है जिसे उसकी मां ने मजदूरी करते हुए पढ़ाया है। मां बेटी दोनों चांपा शादी में गए हुए थे जहां से आज दसवीं का परिणाम घोषित होना है जान जिद कर बेटी पहले ही घर आ गई थी वहीं मां शादी घर में ही रूकी हुई थी जहां पर बेटी के पूरे राज्य में दूसरे नंबर पर आने की जानकारी मजदूर मां को हुई तो वह खुशी से फूले नही समाई और तुरंत वह भी अपनी बेटी के पास आ गई। छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बात करते हुए सुरूचि साहू ने बताया कि पिता के मौत के बाद उसकी मां उसे लेकर नाना के घर जर्वे चली आई जहां नाना के घर रहते हुए वह पढ़ाई करती है। उसकी मां मजदूरी कर उसके पढ़ाई का पूरा खर्च उठाती है जिसने उसकी पिता की कमी उसे कभी महसूस नही होने दी। सुरूचि के नाना खेती करते हैं वहीं बड़ा भाई गायत्री संस्करण भी ग्यारहवीं में पढ़ता है जो उसकी पढ़ाई की ओर ध्यान देता है। पैसे के अभाव में सुरूचि ने कभी किसी से ट्यूशन नहीं लिया वहीं वह खुद ही अभावों के बीच में पढ़कर अपना हौसला बढ़ाते रही है। सुरूचि गणित लेकर आगे की पढ़ाई करना चाहती है वहीं उसका सपना इंजीनियर बनने का है। सुरूचि जिला मुख्यालय के विवेकानंद हायर सेकेण्डरी स्कूल में पढ़ती है जहां के प्राचार्य मनोज पाण्डेय का कहना है कि प्रावीण्य सूची के टाॅपर को माध्यमिक शिक्षा मंडल जितनी राशि का ईनाम देगी उतना स्कूल मैनेजमेंट की ओर से भी उसे दिया जाएगा वहीं नगर का गौरव होने की वजह से अब उससे बारहवीं कक्षा तक शुल्क नहीं लिया जाएगा।

ठेका मजदूर का बेटा हेमंत पूरे राज्य में अव्वल

दसवीं में बेटियों ने मारी बाजी
Hemant Kumar Sahu



रायपुर/छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित हाईस्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा वर्ष 2016 के परिणाम गुरूवार को घोषित कर दिए गए। स्कूल शिक्षामंत्री केदार कश्यप ने बुकलेट जारी कर परीक्षा के परिणाम जारी किए। दसवीं बोर्ड परीक्षा में प्रदेश में इस कुल नियमित 4,26824 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए। इनमें से 4,21,333 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 2,24,209 बालक तथा 1,97,124 बालिकाएं हैं। परीक्षा में कुल 2,32,587 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए, जिसमें सफल रहे परीक्षार्थियों का कुल 55.32 प्रतिशत रहा। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 9 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। बारहवीं बोर्ड की तरह दसवीं बोर्ड परीक्षा में भी लड़कों की तुलना में लड़कियां आगे रही। इसमें से उत्तीर्ण बालिकाओं का प्रतिशत 55.75 तथा बालकों का प्रतिशत 54.84 रहा है। सम्मिलित परीथार्थियों में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण परीथार्थियों की संख्या 49537 है, द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण परीक्षार्थियों की सख्या 86.494 है तथा तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण परीक्षार्थियों की संख्या 94.485 है। 2,071 परीक्षार्थियों को पास की श्रेणी में उत्तीर्ण घोषित किया गया है। 38,405 परीक्षार्थियों को पूरक की पात्रता दी गई है। कुल 133 परीक्षार्थियों के परिणाम विभिन कारणों से रोके गये तथा 827 परीक्षार्थियों के परीक्षाफल निरस्त किये गये हैं।
खेलकूल, स्काउट-गाइड, एन.सी.सी. एन.एस.एस. में प्रावीण्य परीक्षार्थियों एवं साक्षर भारत कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षित (पंजीकृत) 10 असाक्षरों को बेसिक प्राइमर और 10 असाक्षर शिक्षार्थी को क एव ंख श्रेणी में उत्तीर्ण कराने पर अनुदेशकों को परीक्षा में बोनस अंक दिए जाने के कारण छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के आदेशानुसार वर्ष 2016 में खेलकूद-1,005, स्काउट-गाईड 440, एन.सी.सी.-7 अनुदेशक-453 कुल 1905 परीक्षार्थियों को बोनस अंक प्रदान किया गया है।

10वीं बोर्ड के टाॅपर


01 हेमंत कुमार साहू
594/99
नंदेली रायगढ़


02 आकृति राठौर
585/97.50
जांजगीर

02 सुरूचि साहू
585/97.50
जांजगीर


03 वर्तिका कुमारी
584/97.33
रायगढ़


04 सोमनाथ यादव
583/97.17
मुंगेली


05 चन्द्रकला
582/97 प्रतिशत
देवरभट बालोद

06 कपिल साव
581/96.83 प्रतिशत
पुसौर/रायगढ़


06 एकता बेहरा
581/96.83
बसना महासमुंद

06 जानकी सपहा
581/96.83
कापा रायपुर

06 निशिका गुप्ता
581/96.83
रायगढ़



07 अतुल कुमार पटेल
580/96.67
बांधापाली रायगढ़

07 एकता साहू
580/96.67
बलौदाबाजार

07 एकांत चन्द्राकर
580/96.67
रायपुर

07 राहुल कुमार देंवागन
580/96.67
चांपा जांजगीर


08 शिव कुमार पाण्डेय
579/96.50
सिमगा बलौदाबाजार

08 पूजा पटेल
579/96.50
कोरबा


09 पृथ्वीराज चैहान
578/96.33
कनकबीरा रायगढ़


09 सौरव देशमुख
578/96.33
बालोद

09 जयप्रकाश साहू
578/96.33
धमतरी

09 आलोक कुमार होता
578/96.33
चन्द्रपुर जांजगीर

10 दुर्गेश्वरी पटेल
577/96.17
नंदेली रायगढ़

10 श्रुति किरण प्रधान
577/96.17
सरिया रायगढ़

10 काजल पाटनवार
577/96.17
बिटकुला बिलासपुर

10 प्रखर कौशल
577/96.17
चांपा जांजगीर

10 दीपक कुमार सेन
577/96.17
कोरबा

10 दामिनी सिन्हा
577/96.17
दुर्ग

10 योगेन्द्र साहू
577/96.17
लिमतरा दुर्ग

10 सौरभ राजपूत
577/96.17
पंडरिया कवर्धा


जांजगीर-चांपा जिले के टुण्ड्री का रहने वाला है टापर हेमंत


छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित दसवी बोर्ड परीक्षा में सर्वोच्च स्थान पाने वाले हेमंत कुमार साहू का सपना इंजीनियर बनना है। रायगढ़ जिले के महेन्द्र सिंह पटेल मेमोरियल आदर्श हायर सेकेण्डरी स्कूल नंदेली में पढ़ने वाले हेमंत का मूल गांव जांजगीर-चांपा जिले के डभरा ब्लाक का टुण्ड्री है जहां हेमंत कुमार अपने परिवार के साथ निवासी करता है। ग्राम नंदेली का स्कूल हेमंत के गांव से 4-5 किलोमीटर की दूरी पर है। इस स्कूल से दो छात्रों ने प्रावीण्य सूची में अपना स्थान बनाया है। हेमंत ने परीक्षा में 99 प्रतिशत अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया है। हेमंत के पिता निराकार साहू ने बताया कि गांव में उसकी दो एकड़ की कृषि भूमि है जिसमें वो खेती करते हैं वहीं डीबी पावर में वो ठेका श्रमिक के रूप में काम करते हैं। छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से बात करते हुए हेमंत ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, अपने शिक्षक और बीएससी में पढ़ने वाली अपनी बहन को दिया है। हेमंत के अनुसार उन्होंने सामान्य रूप से ही परीक्षा की तैयारी की। उनके अनुसार स्कूल में जो पढ़ाया जाता था उसका घर आकर वे रिवीजन करते थे। परीक्षा के समय उन्होंने 8 घंटे पढ़ाई की और यह सफलता के लिए कारगर सिद्ध हुआ। हेमंत गणित विषय लेकर आगे पढ़ना चाहते हैं तथा आईआईटी की परीक्षा में कामयाबी हासिल कर इंजीनियर बनना चाहते हैं।


रविवार, 17 अप्रैल 2016

आवश्यकता है 36 सनकी लोगों की

dainik chhattisgarh express
पंजाब के 130 आईपीएस अफसरों की कुल संपत्ति लगभग पांच सौ करोड़ रूपए है, उसमें से अकेले मोहाली के एसएसपी गुरप्रीत सिंह भुल्लर के पास 152 करोड़ रूपए की संपत्ति है। साहब चाहते तो अच्छे खासे उद्यमी बन राजा महाराजा सी ठाठ-बाट की जिंदगी जी सकते थे लेकिन जिद थी पुलिस में जाने की तो एसएसपी बन चैबीस घंटे कठिन परिश्रम कर रहे हैं। गुरप्रीत सिंह भुल्लर और उस जैसे कई लोग आसान सी कट रही जिंदगी को छोड़कर अपनी जिद, अपने जुनून के चलते सारी सुविधाआंे को ताक पर रखकर जीवन में कठिन रास्ता चुनते हैं और तब तक चैन से नहीं बैठते जब तक वो अपनी मंजिल पर पंहुच नहीं जाते। चाहे लोकपाल को लेकर जेल जाने को तैयार बैठे बूढ़े अन्ना हजारे हो या फिर उनकी सलाह को भी दरकिनार कर राजनीतिक दल का गठन कर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पंहुचे उनके शिष्य अरविंद केजरीवाल। अट्ठारह घंटे तक कठिन परिश्रम कर पहले गुजरात, फिर देश और अब विश्व पटल पर छा जाने वाले नरेन्द्र मोदी हो या फिर बिहार जैसे पिछड़े राज्य में जहां की एक बड़ी आबादी की रात बिना शराब पिए कटना मुश्किल हो में रातो रात शराब बंदी लागू करने वाले नीतिश कुमार। सब एक ही तरह के जिद्दी, एक ही तरह के जुनूनी लोग हैं। इस तरह के जिद्दी, इस तरह के जुनूनी लोगों को दुनिया सनकी कहती है, लेकिन इतिहास गवाह है इतिहास को बनाने और इतिहास को बदलने का काम भी ऐसे ही जुनूनी और सनकी लोग ही करते हैं। ऐसे ही लोग आगे चलकर महान कहलाते हैं। दैनिक छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस को अपने विस्तार के लिए 36 ऐसे ही जिद्दी, ऐसे ही जुनूनी, ऐसे ही सनकी लोगों की आवश्यकता है जिन्हें अर्जुन की तरह सिर्फ मछली की आंख ही दिखाई देती है। जो अपने लक्ष्य तक पंहुचने से पहले ना थकते हैं, ना रूकते हैं और जब वो रूकते हैं तो एक नया इतिहास सबके सामने होता है। अगर आपको भी लगता है कि आप में एक जिद, एक जुनून, एक सनक और प्रिंट मीडिया में कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो आप हमसे hr.chhattisgarhexpress@gmail.com पर ईमेल भेजकर संपर्क कर सकते हैं।